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आत्मविश्वास और अनुशासन से ही डरमुक्त बनता है भविष्य, परीक्षा को बोझ न बनाएं: प्रधानमंत्री मोदी

प्रधानमंत्री मोदी ने सोमवार को प्रसारित इस विशेष एपिसोड में तमिलनाडु के कोयंबटूर, छत्तीसगढ़ के रायपुर, असम के गुवाहाटी और गुजरात के आदिवासी छात्रों से सीधे संवाद किया। उन्होंने कहा कि इस बार ‘परीक्षा पे चर्चा’ कुछ अलग और खास है, क्योंकि छात्रों के सुझाव पर देश के विभिन्न हिस्सों में जाकर उनसे बातचीत की गई है। प्रधानमंत्री ने इसे छात्रों के साथ बैठकर एक-दूसरे से सीखने का प्रयास बताया।

 

09 Feb 2026

आत्मविश्वास और अनुशासन से ही डरमुक्त बनता है भविष्य, परीक्षा को बोझ न बनाएं: प्रधानमंत्री मोदी

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ‘परीक्षा पे चर्चा’ के नौवें संस्करण के दूसरे एपिसोड में छात्रों को आत्मविश्वास, अनुशासन और डरमुक्त सोच का मंत्र देते हुए कहा कि “जिसका अपने आप पर विश्वास है, उसे कभी डर नहीं लगता।” उन्होंने कहा कि परीक्षा जीवन का अंत नहीं है, बल्कि सीखने और खुद को समझने का अवसर है। सही मार्गदर्शन, निरंतर अभ्यास और संतुलित जीवनशैली से छात्र न केवल परीक्षा में सफल हो सकते हैं, बल्कि अपने सपनों को भी साकार कर सकते हैं।

प्रधानमंत्री मोदी ने सोमवार को प्रसारित इस विशेष एपिसोड में तमिलनाडु के कोयंबटूर, छत्तीसगढ़ के रायपुर, असम के गुवाहाटी और गुजरात के आदिवासी छात्रों से सीधे संवाद किया। उन्होंने कहा कि इस बार ‘परीक्षा पे चर्चा’ कुछ अलग और खास है, क्योंकि छात्रों के सुझाव पर देश के विभिन्न हिस्सों में जाकर उनसे बातचीत की गई है। प्रधानमंत्री ने इसे छात्रों के साथ बैठकर एक-दूसरे से सीखने का प्रयास बताया।

कोयंबटूर में छात्रों से बातचीत के दौरान प्रधानमंत्री ने कहा कि जीवन में अनुशासन प्रेरणा को मजबूती देता है। अगर अनुशासन नहीं है तो कितनी भी प्रेरणा बोझ बन जाती है और निराशा पैदा करती है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जैसे खेती में समय पर काम न हो तो फसल खराब हो जाती है, वैसे ही पढ़ाई और जीवन में अनुशासन के बिना सफलता संभव नहीं है। उन्होंने छात्रों को सलाह दी कि पढ़ाई और पैशन को अलग-अलग न समझें, बल्कि दोनों को जोड़कर आगे बढ़ें।

उन्होंने नई तकनीक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और स्टार्टअप को लेकर छात्रों की जिज्ञासा की सराहना करते हुए कहा कि हर नई तकनीक से डरने की जरूरत नहीं है, बल्कि यह तय करना जरूरी है कि हम उसके गुलाम नहीं बनेंगे। उन्होंने मोबाइल की लत का जिक्र करते हुए छात्रों से कहा कि तकनीक का उपयोग करें, लेकिन उस पर निर्भर न हो जाएं।

रायपुर में छात्रों से संवाद के दौरान प्रधानमंत्री ने शिक्षा और खेल के संतुलन पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि “खेलोगे तो खिलोगे” सिर्फ नारा नहीं, बल्कि जीवन का मंत्र है। पढ़ाई जरूरी है, लेकिन खेल और शारीरिक गतिविधियां भी उतनी ही अहम हैं। छात्रों द्वारा लाए गए पारंपरिक छत्तीसगढ़ी व्यंजन थेथरी और खुरमी का स्वाद चखते हुए प्रधानमंत्री ने माहौल को हल्का और सहज बनाया।

प्रधानमंत्री मोदी ने परीक्षा की तैयारी पर कहा कि सबसे जरूरी आदत लिखने का अभ्यास है। केवल पढ़ते रहने से तनाव बढ़ता है, लेकिन नियमित लिखने से आत्मविश्वास आता है। इसके साथ ही उन्होंने अच्छी नींद को भी परीक्षा की तैयारी का अहम हिस्सा बताया। उन्होंने कहा कि पूरी नींद लेने से मन प्रफुल्लित रहता है और नए विचार आते हैं।

गुवाहाटी में ब्रह्मपुत्र नदी के प्रवाह के बीच छात्रों से बातचीत करते हुए प्रधानमंत्री ने नेतृत्व के गुणों पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि नेतृत्व का मतलब चुनाव लड़ना नहीं, बल्कि डरमुक्त होकर सही काम करने का निर्णय लेना है। उन्होंने कहा, “अगर आप तय कर लें कि चाहे कोई करे या न करे, मैं सही काम करूंगा, तो नेतृत्व अपने आप आपके साथ आएगा।”

प्रधानमंत्री ने छात्रों को एक-दूसरे की मदद करने, कमजोर छात्रों का साथ देने और खुद से लगातार प्रतिस्पर्धा करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि संतोष जीवन में ठहराव ला सकता है, इसलिए खुद से सवाल पूछते रहना और बेहतर बनने की कोशिश करते रहना जरूरी है। ‘परीक्षा पे चर्चा’ के इस एपिसोड में प्रधानमंत्री का संदेश स्पष्ट रहा कि आत्मविश्वास, अनुशासन, संतुलन और डरमुक्त सोच ही छात्रों को न केवल परीक्षा में, बल्कि जीवन में भी सफल बनाती है।

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